गधे, बाघ और शेर की कथा

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एक दिन गधे ने बाघ से कहा:

“घास नीली है।”

बाघ ने विरोध किया:

“नहीं, घास हरी है।”

इसके बाद दोनों के बीच झगड़ा हो गया, और अंत में उन्होंने फैसला किया कि वे जंगल के राजा शेर से न्याय मांगेंगे।

गधा जोर से बोला:

“महाराज, क्या यह सच नहीं है कि घास नीली है?”

शेर ने शांतिपूर्वक उत्तर दिया:

“अगर तुम्हें ऐसा लगता है, तो घास नीली है।”

तब गधा बोला:

“बाघ मेरी बात काटता है, विरोध करता है और मुझे परेशान करता है। कृपया उसे दंडित करें!”

शेर ने कहा:

“बाघ को पाँच साल की चुप्पी की सजा दी जाए।”

बाघ ने सजा स्वीकार कर ली, लेकिन जाने से पहले उसने शेर से पूछा:

“महाराज, आपने मुझे क्यों दंडित किया? आखिरकार घास तो हरी ही है।”

शेर ने सिर हिलाया और उत्तर दिया:

“वास्तव में, घास हरी है।”

हैरान होकर बाघ ने पूछा:

“तो फिर यह सजा क्यों?”

इस पर शेर ने कहा:

“तुम्हारी सजा का घास के रंग की सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है – चाहे वह हरी हो या नीली। यह सजा इसलिए है क्योंकि एक बुद्धिमान प्राणी होकर भी तुमने अपना समय गधे से बहस करने में बर्बाद किया। और उससे भी बुरा, तुमने मुझे भी इस तरह के निरर्थक सवाल में उलझाया।”

और शेर ने निष्कर्ष निकाला:

“सबसे बड़ी समय की बर्बादी है, उन मूर्खों या कट्टरपंथियों से बहस करना, जिन्हें न तो सच्चाई की परवाह है और न ही वास्तविकता की, बल्कि जो केवल अपनी मान्यताओं और भ्रांतियों की जीत चाहते हैं।”

कहानी से सीख

ऐसे लोग होते हैं, जो – चाहे आप उन्हें कितने भी प्रमाण दिखा दें – समझ नहीं सकते या समझना नहीं चाहते। कुछ लोग घमंड, नफरत या कड़वाहट से अंधे होते हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य सही साबित होना है, भले ही वे गलत हों।

सफलता का एक मूल सिद्धांत है: सीखने और समझने के लिए हमेशा तैयार रहो।

सबसे सफल लोग हमेशा अपने दिल और दिमाग को नई सीख के लिए खुला रखते हैं – लेकिन केवल उनके लिए, जो उनसे आगे हैं और जिनसे वे सच में कुछ सीख सकते हैं।

उन लोगों के साथ बहस करने के जाल में मत फंसो, जिनका मकसद केवल तुम्हें जानबूझकर गलत समझना है।

समझो कि कब तुम्हारा सामना ऐसे लोगों से है – और जरूरत पड़े तो अपने दायरे पर फिर से विचार कर सही कदम उठाओ।

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